दर्द दिल का – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

दर्द दिल का ना मेरा बढ़ाओ
क्या होगा ये खुद को बताओ।

तुम सोचो न ज्यादा कभी भी
वक्त बाकी बहुत है अभी भी।
हम मस्त मौला बिंदास ऐसे
साख अपनी खुद ही बचाओ।।

करना है तुमको तो भला कर
रोशनी तुम दिखा दो जलाकर।
तू सूरज से कम क्या हो जानो
जो सोये हैं उनको जगाओ।।

बात मानो मेरी ऐ भाई
बनते हो तुम सब क्यों कसाई ।
मौका मिलते भला कर देना
नाम कुछ तो अपना कमाओ ।।

अमन चैन से रहना जहाँ भी
प्यार अपना लुटाओ वहाँ भी।
कटुता आये न मन में तेरे
गिरा हैं जो उसको उठाओ।।

रिश्ता है जो उसको निभाना
बदनामी से खुद को बचाना।
बुरा करो न करने तुम देना
फर्ज इंसान का तुम दिखाओ।।

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