तेरा रूप सादा – शिशिर मधुकर

तेरा रूप सादा करे मुझसे वादा
कम ना कभी भी ये प्रीत होगी
माना मुश्किल हुआ थोड़ा जीना
एक दिन फिर से मगर जीत होगी

चलेगा समय तो बदलेंगी राहें
नए मोड़ जीवन में आते रहेंगे
ये उम्मीद पलती है पर मेरे मन में
एक दिन तू फिर से मेरी मीत होगी

है दुश्मन ज़माना मुहब्बत का देखो
देता है ढेरों अपनी दुहाईं
पर ना चलेगी अब इसकी ज्यादा
आसान मिलने की फिर रीत होगी

तराने कई मैंने गा के भी देखे
सुर ना मगर कोई उनमें सजा था
तरन्नुम खुद ही से आबाद होगी
जो होंठों पे बन के तू गीत होगी

ये माना बहारे नहीं हैं फ़िज़ा में
बागों में रौनक दिखती नहीं है
खिलने दो सरसों के फूलों को मधुकर
रंगत हर इक ओर फिर पीत होगी

शिशिर मधुकर

6 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 04/04/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 04/04/2019
  2. vijaykr811 vijaykr811 04/04/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 04/04/2019
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 06/04/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/04/2019

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