ज़िन्दगी बिन तुम्हारे थमी रह गयी…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

(जनाब बशीर बद्र साहिब की एक ग़ज़ल है….’ये कसक दिल की दिल में चुभी रह गयी…. ज़िन्दगी में तुम्हारी कमी रह गयी’…उसी ज़मीन में लिखी ग़ज़ल…आपके सुपुर्द…)

शमअ तन्हा जली तो जली रह गयी…
ज़िन्दगी बिन तुम्हारे थमी रह गयी…

चाँद तपता रहा नभ की अमराई में…
बन सँवरके ठगी चाँदनी रह गयी…

मुड़ के देखा तो था कुछ न बोला मगर…
एक उम्मीद जलती बुझी रह गयी…

उम्र भर इम्तिहाँ में रही ज़िन्दगी….
बेबसी में महब्बत घुटी रह गयी….

शब् भिगोती रही सुबह रोती रही….
जां सुबकती सुबकती मेरी रह गयी…

कुछ न आता नज़र सब से हूँ बेखबर…
पल हरिक शै तेरी ही छवी रह गयी….

संगज़ाँ ज़िंदगी तेरी आमद नहीं…
राख लोटे में जैसे भरी रह गयी…

उम्र भर साथ देता यहां कौन है…
याद तेरी मेरा सँग बनी रह गयी…..

जीत लाया ज़मीनों जहां सब मगर….
*ज़िन्दगी में तुम्हारी कमी रह गयी*….

संगज़ाँ = जान मुश्किल से निकलना
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/सी.एम्.शर्मा (बब्बू)

8 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 04/04/2019
    • C.M. Sharma C.M. Sharma 06/04/2019
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 04/04/2019
    • C.M. Sharma C.M. Sharma 06/04/2019
  3. vijaykr811 vijaykr811 04/04/2019
    • C.M. Sharma C.M. Sharma 06/04/2019

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