मुकाम – अरुण कुमार झा बिट्टू

बस जिंदगी में इतना मुकाम चाहता हूं।
जो काम आए सबके वो काम चाहता हूं।
अपने लिए तो जीते हैं सब इस जमीं पे
औरोकेलिए अपना सुबेह शाम चाहता हूं।
बस जिंदगी में इतना मुकाम चाहता हूं।

बढ़े मेरा वतन हो खुशहाली चारो ओर।
होगी मुझे खुशी जो कर पाऊ मै सहयोग
अपने लिए थोड़ी इज्जत सम्मान चाहता हूं।
बस जिंदगी में इतना मुकाम चाहता हूं ।

धन दौलत से करना है क्या भला मुझे।
सकूं की दौलत मरते भी दाम रहे
चरित्र का में दामन बेदाग चाहता हूं
बस जिंदगी में इतना मुकाम चाहता हूं।

जब आखरी सफर हो मुस्कान लब पे हो
गांव की हो मिट्टी , हुजूम संग हो
मर कर भी नेकियों का बखान चाहता हूं।
बस जिंदगी में इतना मुकाम चाहता हूं।

6 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 29/03/2019
    • arun kumar jha arun kumar jha 29/03/2019
  2. vijaykr811 vijaykr811 29/03/2019
    • arun kumar jha arun kumar jha 29/03/2019
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/03/2019
  4. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 09/04/2019

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