किनारा – डी के निवातिया

किनारा

मझदार में टूटी कश्ती को किनारा नहीं मिलता,
मन के अंधेरों में खोये को,उजियारा नहीं मिलता
संभलकर चल राही, अपने वक़्त को पहचानकर
बीता हुआ लम्हा जिंदगी में दोबारा नहीं मिलता !!
!
डी के निवातिया

8 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 29/03/2019
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 04/04/2019
  2. arun kumar jha arun kumar jha 29/03/2019
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 04/04/2019
  3. Garima Mishra Garima Mishra 29/03/2019
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 04/04/2019
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/03/2019
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 04/04/2019

Leave a Reply