फूल की क्या खता – शिशिर मधुकर

मुझे बरबाद कर वो चैन से मुँह ढक के सोते हैं
यहाँ मालिक सभी क्या हुस्न के ऐसे ही होते हैं

फूल की क्या खता वो तो खिलेगा वक्त आने पे
ये तो अलियों की गलती है जो अपना चैन खोते हैं

किसी के सांस की खुशबू भुला जो भी नहीं पाते
छुपा तन्हाई में खुद को वो मन ही मन में रोते हैं

जिन्हें मालूम है ये प्यार तो केवल तड़प देगा
वो इसके बीज ही मन में कभी अपने ना बोते हैं

उम्र भर संग निभाने का अगर वादा करे कोई
ए मधुकर जान ले वो शब्द अक्सर निकले थोते हैं

शिशिर मधुकर

6 Comments

  1. vijaykr811 vijaykr811 28/03/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/03/2019
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 29/03/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/03/2019
  3. arun kumar jha arun kumar jha 29/03/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/03/2019

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