होली के गीत और नगमें-2019-बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

  1. कुंडलियाँ – छंद

  2. भाईचारे प्रेम का , होली यह त्योहार
    मिल जातेे दुश्मन गले, देते रंग निखार।
    देते रंग निखार , डमाडम ढ़ोलक बाजे
    उसपर लगा गुलाल,खाओ पकवान ताजे।
    राधा – मोहन संग , साथ मिले रंग डारे
    भीज गये ब्रज लोग, हंसे खुशी के मारे ।
  3. आयी होली देखो भैया
    अपना रंग जमाने।
    बुढ़वा साली देवर भागे
    अपना रूप दिखाने।।बच्चों के हुड़दंग देख कर
    मस्त हुये बनवारी।
    राधा दौड़ी – दौड़ी भागी
    पीछे रासबिहारी।।चोरी – चोरी रंग डालते
    करे खूब तैयारी।
    हंसी ठिठोली रंग जमाती
    वाह रे ऐसी यारी।।घर – घर जाके मौज मनाते
    और गुलाल लगाते।
    झूमे – नाचे बड़े मजे में
    गाते और बजाते।।

    छोटे – बड़े सभी हैं मिलते
    भेद न कोई होता।
    बड़ों को सम्मान है मिलता
    प्यारा छोटा होता।।

    सत्रुता होता न कोई मन में
    होली मैल धुलाता।
    दुर्जन, सज्जन बनके ऐसे
    अपना फर्ज निभाता।।

  4. कहीं रंग गुलाल, कहीं बाजे ढ़ोल – मजीरा
    कहीं धुन होली की, कहीं गाये जोगीरा।पावन है त्योहार, उमंग – तरंग के जैसा
    जोड़ दे टूटे बंधन , लगे न कोई पैसा।प्रीत सिखाती, सब को होली, गले मिलाती
    सत्रु मन मैल को धोते , चौड़ी करते छाती।भेद नहीं रखते मन में, चौपालों पर साथ
    एक साथ में खाते, मिलते हाथ से हाथ।

    रस्म निभाते आये हैं, पुरुखों की बलिहारी
    जैसे तुम हो जानते , राधा – रासबिहारी।

    वेद पुराणों की होली, जाने सकल जहान
    बच्चे – बूढ़े औ जवान, रखते इसके मान।

    मोद रस में रम जाते, नर हो या फिर नारी
    चारो तरफ बसंत, लगता है मनोहारी।

    पोर – पोर में भर जाता, रंग रस मदन का
    रंग रूप निखर जाता, उजड़े भी चमन का।

  5. टुटे रिश्तों को जोड़ देता है
    होली हर बंधन तोड़ देता है।रहता ना कोई मलाल मन में
    छुपे मैल को मरोड़ देता है।प्रेम सद्भाव भाईचारा में
    अपनी तरफ ये मोड़ देता है।कोई न रहता किसी की बैरी
    कटुता दिल से छोड़ देता है।

    रंग गुलाल की आ गयी होली
    गाते – बजाते होड़ देता है।

  6. दस्तक देती फूल है, आया फागुन मास
    रंग चढ़ाने आ गया, हंसा लाल पलास।विरह वेदना है बढ़ी, और बढ़ी मन पीर
    कोयल कूके इस तरह, जैसे लगती तीर।वन – उपवन सारे सजे, सजे चमन ये बाग
    लोग सभी गदगद हुए, खेल रहे मिल फाग।रंगों का त्योहार है , होली है हुड़दंग
    झूमे नाचे साथ में , पीके जैसे भंग।

    बैरी! सज्जन बन गये, मिले गले से आज
    रंग प्रेम का जब पड़ा, खोल दिए सब राज।

  7. होली के रंगरंग – गुलाल की आई होली
    लेकर फागुन मास।
    बाग – बगिया, वन – उपवन सज गये
    चारो ओर उल्लास।।खेत खलिहान खग सारे चहके
    झूमें नाचे मस्त किसान ।
    मोर – पपीहा कोयल गाये
    छेड़ रहे गजब की तान।।गाँव – जवार, गली – मुहल्ले
    धूम मची अजब की खेल।
    शहर की देखो गलियारों में
    एक दिन में होती मेल।।

    चौपालों पर भीड़ है लगती
    जब – जब फागुन आता।
    चहलकदमी गाँवों में रहती
    कितना है मन भाता।।

    ढ़ोल – करताल बजती मृदंग है
    सुर – ताल होली के संग।
    झूमे – नाचे गाये सब मिलकर
    आया देख होली हुड़दंग।।

    राग – द्वेष, मन – मैल हटाकर
    दुश्मन गले लग जाते हैं।
    भेद – भाव मन में नहीं रखते
    मानवता में जग जाते हैं।।

    पोर – पोर विरह नस – नस में
    ऋतु राज भर देते हैं।
    सृष्टि की भी समारंभ इसी में
    दुख सारे हर लेते हैं।।

    ख्याल रिश्तों का मन में लेकर
    खूब मजे उड़ाते हैं।
    होली हुड़दंग का है भैया
    रंग – गुलाल लगाते हैं।।

    भाई – चारा प्रेम सिखाता
    सब का मन हर्षाता है।
    “बिन्दु” भैया जोर से बोले
    सबको ये तरसाता है।।

6 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 27/03/2019
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 27/03/2019
      • C.M. Sharma C.M. Sharma 27/03/2019
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 27/03/2019
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 30/03/2019

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