जो तुम साथ होते- शिशिर मधुकर

जो तुम साथ होते, तुम्हें देखते हम, तन्हा सी इतनी ना, ये रात होती
कुछ अपनी भी कहते, तेरी भी सुनते, सारे जहाँ की, फिर बात होती

तेरी गली से, गुजरे किए हम, लेकिन ना तुमने, कुछ भी कहा था
दिल में उतरते, एक दूसरे के जो, थोड़ी सी रुक कर, मुलाकात होती

यूँ तो मुकद्दर ने, सब कुछ दिया है, मगर अब भी पाने की, चाहत है बाकी
अगर मिलते तुम तो, समझ लो जहाँ में, वो ही तो असली, सौगात होती

गिरा दें दीवारें ये, सब नफ़रतों की, दिल में है अक्सर, आवाज़ उठती
अभी तक तो क्या कुछ, हम कर गुजरते, जो थोड़ी भी अपनी, औकात होती

ये सूखी सी नदिया, ये ठहरी सी धारा, हकीक़त को देखो, बयां कर रही है
उमंगे मचलती, लहरें भी दिखती, खुल के जो मधुकर, बरसात होती

शिशिर मधुकर

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 27/03/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 27/03/2019

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