उल्फ़त का ये अंदाज़ – शिशिर मधुकर

फ़कत आवाज़ सुनने से नहीं अब काम चलता है
तुझे पाने का सपना मेरी इन अंखियॊं में पलता है

तू मुझसे दूर रहती है मगर रिश्ता नहीं तोड़ा
तेरी उल्फ़त का ये अंदाज़ थोड़ा मुझको खलता है

दिल में जज्बात का उठना कोई रोके बता कैसे
किसी से पूछ के सागर कभी थोड़े मचलता है

मुकद्दर को भी मैं परेशान होता रास आता हूँ
तभी तो चोट लगती है ये दिल जब भी संभलता है

मैं अपना दर्द भी देखो किसी से कह नहीं पाता
थोड़े अशआर बन मधुकर वो काग़ज़ पे निकलता है

शिशिर मधुकर

4 Comments

  1. vijaykr811 vijaykr811 24/03/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 26/03/2019
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 27/03/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 27/03/2019

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