पाषाण और नग – शिशिर मधुकर

शरीरों के मिलन से आत्मा मिलतीं नहीं जग में
वो ही मनवा में बसता है झुका होता है जो पग में
सजाए ना कोई उसको अगर कुछ स्वर्ण के भीतर
भेद दिखता नहीं कोई फिर तो पाषाण और नग में

शिशिर मधुकर

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