उल्फ़त – शिशिर मधुकर

झलक देखी मेरी तूने प्यार उसमें भी कर डाला
तेरे फूलों से लफ्जों ने मेरे दामन को भर डाला
मिला जब तक नहीं था तू मेरे मन में उदासी थी
तेरी उल्फ़त की बातों ने मेरे हर दुख को हर डाला

शिशिर मधुकर

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