उल्फ़त में दीवाने – शिशिर मधुकर

अरे उल्फ़त में दीवाने मेरे पीछे क्यों आता है
घूम के जुड़ ही जाएगा अगर जन्मों का नाता है

समय से ही मिला करती हैं सारी नेमतें जग में
हर इक इंसान को इस ज़िंदगी में ये छकाता है

नज़र से गर नज़र मिलती है तो कैसे कहूँ तुझसे
सोए अरमान मेरे सीने में तू लाखों जगाता है

समझ आती नहीं मुझको कभी इंसा की ये फितरत
वो जिससे प्यार करता है नज़र उससे चुराता है

तू ही तड़पा नहीं करता देख के मुझको ए मधुकर
मेरे ख्वाबों में आ के तू भी तो मुझको सताता है

शिशिर मधुकर

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 23/03/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/03/2019

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