जोश – शिशिर मधुकर

मुहब्बत के हसीं सपने सभी आँखों में पलते हैं
इसी की आस कर परवाने शमा के संग जलते है

वो भी खुश है किसी की आँख में तस्वीर है उसकी
हम तो इस आस में बस देख खाली हाथ मलते हैं

मुहब्बत में अगर हो जोश दुनिया भर से लड़ने का
नदी की धार के संग भी कई पत्थर उछलते है

अगर एक हाथ साथी का हो हरदम साथ में जग में
कठिन लम्हों में भी फिर इंसान गिरने से सम्भलते हैं

ना आँखों में समुन्दर है ना माथे पे कोई रेखा
दर्द अशआर बन मधुकर के कागज पे निकलते हैं

शिशिर मधुकर

4 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 23/03/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/03/2019
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 23/03/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/03/2019

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