प्यार की दौलत – शिशिर मधुकर

ए गोरी तू मुझको आ के अपने रंगों में रंग दे
लब से छू के प्याले में थोड़ी सी भर के भंग दे

जीवन है रंगो का मेला नहीं कटेगा कभी अकेला
डाल गले में दोनों बहियां मुझको तू अपना संग दे

तुझे मनाऊँ तुझे रिझाऊँ प्रेम से अपने गले लगाऊँ
कह कान्हा से तेरी खातिर मुझको मिलने का ढंग दे

रिश्ते चाहें प्यार की दौलत पैसे से ना सुख मिलता
किसी हाल तू ए मितवा इनको ना लगने जंग दे

सोच बड़ी हो जीवन में फिर दुख हैरां ना करते है
मधुकर कहता हे ईश्वर तू कभी नज़रिया ना तंग दे

शिशिर मधुकर

4 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 23/03/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/03/2019
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 23/03/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/03/2019

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