आखिर तुम क्यों चली गई

शीर्षक-आखिर तुम क्यों चली गई
तुम क्यों चली गई
तुम तो थी ज़िन्दगी मेरी
फिर मेरी साँसे ले कर क्यों चली गईं
आँखों मे बसी थी तुम
फिर क्यों मेरा ख़्वाब मुझसे
तुम छीन ले गई
कुछ तो कहना था ना
जाते -जाते क्यों सिर्फ खामोशी दे गयी
मेरे हिस्से की रौशनी ले कर
मुझे अंधेरा कर गई
आखिर तुम क्यों चली गई

तुम ही बताओ
तेरे बिना जी पाऊँ कैसे
दुनिया तो है अब भी
पर तुम ही तो थी दुनिया मेरी
ढूंढूं कहाँ तुम्हे
तुम्हारी खबर कहीं से
अब क्यों मिलती नहीं
अब क्यों दर्पण में
तुम्हारा अक्स दिखता नहीं
तुम्हारे जाने के दर्द पर
अब कोई मरहम काम करता नहीं–अभिषेक राजहंस

3 Comments

  1. vijaykr811 vijaykr811 20/03/2019
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 22/03/2019
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 23/03/2019

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