होली :-विजय

अयोध्या से लेकर जनकपुर तक
राम खेले होली जानकी संग
मथुरा से लेकर वृन्दावन तक
श्याम खेले होली गोपियों संग

सरयू से लेकर यमुना तक
होली के रंग में रंगे तन-मन
धरा पर बिखरे ऐसे रंग
जैसे इंद्रधनुष हो अम्बर

होली खेले सब मिलजुलकर
पता चले नही कौन किस मजहब
मन के मिलन का है ये त्योहार
नही किसी से हो कोई खटपट

रंग गुलाल से रंगे सबके गाल
न हो मन में कोई भी मलाल
प्रेम गुलाल की है ये होली
जीवन न हो किसी की भी कोरी

नाते-रिश्तेदार हो या फिर गैर
होली करे दूर सबकी बैर
पुआ गुझिया साथ में ठंडई
होली में चेहरे रहे खिली-खिली

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/03/2019
    • vijaykr811 vijaykr811 22/03/2019
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 23/03/2019
    • vijaykr811 vijaykr811 23/03/2019

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