कैसा गुरूर – शिशिर मधुकर

उल्फ़त जो तुमसे हो गई मेरा कसूर है
कुछ हाथ तेरा भी मगर इसमें जरूर है

माना खुदा ने रूप की दे दी है तुमको खान
मिट्टी है गर बदन तो फिर कैसा गुरूर है

सारा सुकूँ का खेल है जिसको जहाँ मिले
मुझको मिला है ये वहाँ तेरा हुजूर है

दिल को लगाना तोड़ना अंदाज हैं तेरे
इसके लिए सारे जहाँ में तू मशहूर है

मैं तो किसी के प्यार को तकता ही रह गया
मधुकर तुझे ना दिल लगाने का सहूर है

शिशिर मधुकर

6 Comments

  1. vijaykr811 vijaykr811 20/03/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/03/2019
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 22/03/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/03/2019
      • C.M. Sharma C.M. Sharma 23/03/2019
        • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/03/2019

Leave a Reply