कैसे दूँ मुबारकबाद- Bhawana kumari

कैसे खेलूँ होली इस बार रंगो की,
जब सरहद पर खेली जा रही होली खूनों की।

कैसे रंग लूँ गाल इस बार अबीर-गुलाल से,
जब नहीं बुझी है आग हमारे सीने की ।

कैसे दूँ मुबारकबाद इस बार होली की,
जब सरहद पर खेली जा रही होली खूनों की ।
भावना कुमारी

4 Comments

  1. vijaykr811 vijaykr811 19/03/2019
    • Bhawana Kumari Bhawana Kumari 26/03/2019
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 22/03/2019
    • Bhawana Kumari Bhawana Kumari 26/03/2019

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