आखिर…

आखिर..
क्या लगती हो तुम मेरी
कैसा है रिश्ता तुमसे
क्या सच मे वजूद में हैं
तुम्हारे-मेरे बीच
वो रिश्ता
जिसके बारे में लोग
दबी जुबान बातें बनाते है

आखिर..
क्यों तुम
मेरे ख़्वाब में आकर
मेरा हो जाना चाहती हो
क्या तुम्हें इतना ऐतबार है मुझपे
क्या तुम गुलाब हो
जिसे देख कर मैं महक जाता हूँ

आखिर..
क्यों तुम
आदत बनती जा रही हो
मेरी आँखें क्यों तुम्हारे सिवा
कुछ और देखना नहीं चाहती
क्यों कैद कर लिया तुमने
अपने खुले केशो के पाश में
मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा
तुम्हारे-मेरे बीच
ये चल क्या रहा है—अभिषेक राजहंस

3 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 19/03/2019
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 19/03/2019
  3. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 19/03/2019

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