ममता के आँचल से — Bhawana Kumari

आज कल मैं बहुत ही बुरी हो गई हूँ माँ,
मेरी बातें और मैं दोनो कड़वी हो गई है माँ ।
बिना कुछ सोचे समझे तुम्हें कुछ भी सुना देती हूँ माँ,
अपनी मर्यादा भूल कर तुम्हें खारी खोटी सुना देती हूँ माँ ।
मेरी दिल की पीड़ा सुनने वाला यहाँ कोई नहीं है माँ,
मेरे घाव इतने गहरे हो गए है कि अब उस पर,
कोई भी महरम काम नहीं करती है माँ ।
इसलिए अपनी हर घाव से तुम्हें रुबरु करा देती हूँ माँ,
जब भी यहाँ कोई कह देता है मुझसे कुछ उल्टी सिधी बातें,
तो अपनी सारी रंजिशें तुम पर उतार देती हूँ माँ ।
शिकायत किसी ओर से होती है उलाहना तुम्हें देती हूँ माँ,
तुम भी बिना कुछ कहे मेरी हर बात सुन लेती हो माँ।
मेरी हर परेशानी को अपनी ममता के आँचल से पोंछ देती हो माँ ।
सचमुच आज कल मैं बहुत ही बुरी हो गई हूँ माँ,
बिना कुछ भी सोचे समझे तुमसे कुछ भी कह देती हूँ माँ ।
भावना कुमारी