वो दिन तो आएगा – शिशिर मधुकर

भले मैं आज खाली हाथ हूँ वो दिन तो आएगा
कोई बाँहों में भर के मुझको सीने से लगाएगा

मेरी नस नस में कोई बस चुका है खून के जैसा
मुझे उम्मीद है वो अब आ के सांसों में समाएगा

नींद आती नहीं थी स्वपन जब श्रॄंगारमय ना थे
कोई बरसा के अपना प्रेम फिर मुझको लुभाएगा

परीक्षा ले रहा है वक्त तो तैयार हूँ मैं भी
देखते हैं ये भी आखिर मुझे कितना सताएगा

इन तपती हुई राहों में सुकूँ मुझको दिया जिसने
उस पेड़ की छाया को मधुकर ना भुलाएगा

शिशिर मधुकर

6 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 18/03/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/03/2019
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 18/03/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/03/2019
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 18/03/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/03/2019

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