मुसीबत – शिशिर मधुकर

मुहब्बत भी करना बना अब मुसीबत
नाराज़ होता है जिसको भी चाहो
छुआ तो नहीं देखो मैंने किसी को
ख़ता क्या है मेरी तुम ही बताओ

खिला है अगर कोई गुल इस जहाँ में
दुनिया तो उसको देखा करेगी
खुशबू से उसकी चाहो ना चाहो
फिज़ा हर तरफ़ की तो महका करेगी
हुस्न तो गिराता है बिजली जहाँ में
कितना भी तुम इसको चाहे छुपाओ

मुहब्बत भी करना………..

खुशी बाँटने से तो बढ़ती निरंतर
होता नहीं है कोई इसमें घाटा
ज़रा नूर चेहरों पे उसके तो देखो
जिसने भी दिल की खाई को पाटा
मुहब्बत की दौलत रखो ना छुपाकर
खुलकर के इसको सब में लुटाओ

मुहब्बत भी करना……..

4 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 18/03/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/03/2019
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 18/03/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/03/2019

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