इश्क की दौलत – शिशिर मधुकर

बड़े हो मुझसे तुम थोड़े मगर मैं तो ना डरती हूँ
तुम्हारी हर अदा को ए सनम मैं प्यार करती हूँ

तुम्हारे नाम की बिंदी और ये माँग में टीका
लगा के होठों पे लाली मैं तो सजती संवरती हूँ

मुझे मालूम है साया तेरा है साथ में हरदम
उसी की ओट में मैं काम सारे कर गुजरती हूँ

मेरे दिल में उमंगों का समुन्दर ज्वार लेता है
तुझे आँखों में आँखें डाल जब बाँहों में भरती हूँ

इक तेरे इश्क की दौलत ही मुझको रास आती है
इसी को लूट के मधुकर यहाँ मैं तो निखरती हूँ

शिशिर मधुकर

4 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 18/03/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/03/2019
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 18/03/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/03/2019

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