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भँवर - डी के निवातिया

भँवर से निकलूँ तो किनारा मिले,
ज़िंदगी को जीने का सहारा मिले
बड़ी उलझन में है हर एक लम्हा
काश किसी अपने का सहारा मिले !!
!
डी के निवातिया

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