भँवर – डी के निवातिया

भँवर - डी के निवातिया

 

भँवर से निकलूँ तो किनारा मिले,
ज़िंदगी को जीने का सहारा मिले
बड़ी उलझन में है हर एक लम्हा
काश किसी अपने का सहारा मिले !!
!
डी के निवातिया

3 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 15/03/2019
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/03/2019
  3. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 16/03/2019

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