क्या है ये (Kya hai ye)

क्या है ये

 

क्या है ये ! आखिर ये है क्या ?

अगर पैदा हो गयी में बनके लड़की

तो हक़ मेरे गए क्या

लड़की हूँ  धिक्कार नहीं

छीन ने का अधिकार मेरे

किसी को अधिकार नहीं

सड़क पे चलना भी मेरे लिए

बवाल है

देखते ही आती आवाज़ें

“वो देखो जा रही माल है “

और हाँ कानून व्यवस्था का तो ज़िक्र भी मत करना

वो तो मुझसे भी  ज़्यादा बे-हाल है

एक बात तो तय है , वो रही ही होगी

ज़िन्दगी भर छिपके घर में

अगर उसकी इज्जत पे नहीं उठा सवाल है

……  पर क्या फर्क पड़ता है

बदल चूका है ज़माना , बदल चुका  साल है

अब तो क़द्र भी उसी जवाब की  है

जिसपे उठ चूका सवाल है और मच गया बवाल है

 

द्वारा – मोहित सिंह चाहर ‘हित’

3 Comments

  1. Dr. Savita Joahi 08/03/2019
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 11/03/2019
  3. Sanjay Khoth 19/03/2019

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