तुम हो तो मैं हूँ

तुम हो तो मैं हूँ
हाँ ,पता नहीं है मुझे
या जाहिर नहीं करना चाहता
सच कहूं तो मैं तुम्हारे सामने झुकना नहीं चाहता
पुरुष हूँ ना
तुम बताओ फिर भी आज
तुम क्यों इतना करती हो मेरे लिए
क्यों मेरे लिए
भूखे रह कर उपवास करती हो
क्यों मेरे लिए करवाचौथ करती हो
क्यों मेरी कलाई पर राखी सजाती हो
मुझे नजर न लगे किसी की
बस इसलिए मुझे काजल का टीका लगाती हो
आखिर क्यों करती हो ये सब
मैंने तुम्हें कुछ तो नहीं दिया है कभी भी
हमेशा तुम्हे किसी न किसी तरह गिराता आया हूँ
तुम्हारी भावनाओ का मजाक बनाता आया हूँ
मैंने कभी भी तुम्हे ठीक से वक़्त नही दिया
तुम क्यों अपनी पूरी ज़िन्दगी आफत में डालती हो

जितना बार गिरा हूँ
उतनी बार उठाया है मुझे
पता नहीं क्यों
तुम मेरे खाने के बाद खाती हो
मेरे बीमार रहने पर
रात-रात भर जागती हो
बिन माँगे ही सब दे देती हो
आखिर उस रब ने तुम्हे कैसे रचा है
हमेशा मेरे साथ रहती हो
कितने ही रूपो में आकर
मेरे अस्तित्व को बचाया है
माँ,पत्नी, दादी ,नानी ,फूफी
बहन, ताई ,काकी हर रूप में
तो आयी हो तुम
स्नेह ,प्यार ,उम्मीद ,भरोसा
सब तुमने दिया है
आखिर उस रब ने तुम्हे कैसे रचा है
मैं पुरुष हूँ
पर मैं ये जानता जरूर हूँ
तुम हो तो मैं हूँ
वरना मैं कुछ भी नहीं हूँ–अभिषेक राजहंस

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 11/03/2019
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/03/2019

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