सुनो ना, तुम आ जाना

सुनो ना
अरे सुनो ना
मैं तुमसे ही बात कर रहा हूँ
जैसे चाँद को देख कर
साहिल उमड़ता है
जैसे बादल को देख कर
धरा का दिल मचलता है
ठीक वैसे ही मेरा दिल भी
तुम्हारे आने के एहसास से धड़कता है

बताओ ना
कैसे आओगी तुम
क्या तुम मुझे इशारों से बुलाओगी
या अपने पायल की आवाज सुनाओगी
या अपनी चूड़ियां जोर से खनकाओगी
तुम बताओ ना
आखिर कब तक आओगी
क्या किसी भीड़ में
मुझसे अपने नैन लड़ाओगी
या अपने खुले बालो से मुझे रिझाओगी

तुम जब भी आना
बस आना जरूर
क्या तुम्हें भी मेरी तरह
लिखने का शौक रहता होगा
क्या तुम्हें भी मेरी तरह
पुराने गाने सुनने में मजा आता होगा
बताना जरूर
क्या गुलाबजामुन पसंद है तुम्हें भी
क्या तुम मेरे लिए
कभी-कभी गाजर का हलवा बनाओगी

सुनो ना
मैं चाँद से रोज बात करता हूँ
तुम मेरे साथ चाँदनी रात में
क्या चाँद से गप्पे लड़ाओगी
मुझे ये तो नहीं पता
तुम कब आओगी
पर जब भी आना
हल्की नारंगी साड़ी पहन कर आना
माथे पे छोटी सी बिंदी लगा कर आना
और नाक पे बुंदी थोड़ी चमकने वाली पहन लेना
और क्या कहूँ तुमसे
बस इतना जरूर करना
मै अपने हिस्से का सब दे दूंगा तुम्हे
तुम मेरी सांसों का हिस्सा बन जाना
दिल से थोड़ा भावुक हूँ मैं जरा
जब एक बार आ जाओ ना तो
फिर मुझसे दूर मत जाना
मैं तुम्हे गँवाना नही चांहूँगा कभी
बस इसलिये तुम मेरी धड़कन बन जाना–अभिषेक राजहंस

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