वो बेवजह नहीं है

जो भी है
तुम्हारे मेरे बीच
वो बेवजह नहीं है
तुमसे रिश्ता मेरा
सिर्फ इस जन्म का तो नहीं है
तुमसे मिलना
उस रब को भी मंजूर है
फिर भला इन आँखों का क्या कसूर है
हाँ, शायद मुश्किल हो थोड़ा
तुम्हारे लिए
मुझे क़बूल करना
पर हमारा साथ तो
उस खुदा को भी क़बूल है
भले हमारे रिश्ते को
कोई किनारा मिले या ना मिले
भले मेरी उँगलियाँ थाम कर
तुम साथ चलो या ना चलो
ये सूरज जितना दमकेगा
ये चाँद जितना चमकेगा
हमारा रिश्ता भी उतना ही बढ़ता जाएगा
ये प्यार वाली दोस्ती नहीं
ये दोस्ती वाला प्यार है
ये बस बढ़ता रहेगा
तुम भले भूल जाओ
कुछ बरस बाद मुझे
मेरे अंदर तुम् बढ़ती ही रहोगी
इसलिए तुमसे फिर
आज कहता हूँ
ये जो है ,हमारे बीच
वो बेवजह नहीं है–अभिषेक राजहंस

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