तुझे भी मानना होगा

आसमाँ और होता है, जमीं कुछ और होती है,
ख्वाब और कहते है, सच्चाई कुछ और होती है।

तसव्वुर में कोई चेहरा, मेरे दिन रात रहता है,
अंधेरे पर और होते हैं, रोशनी कुछ और होती है।

रास्तों पर मिलने वाली, हर इक ठोकर बताती है,
बचपना और होता है, जवानी कुछ और होती है।

दो रंग में रंगा जमाने का, यही दस्तूर होता है,
नीति कुछ और कहती है, रीति कुछ और होती है।

तू जब तक है समुंदर में तुझे भी मानना होगा,
सतह से और दिखती है गहराई कुछ और होती है।

—भारत (ভারত জৈন)

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