एक बार फिर दिखो ना

जैसे पिछली बार दिखी थी
एक बार फिर दिखो ना
आंखों से शुरू हुई थी
कहानी हमारी
आँखों पे ही खत्म करो ना
वो जो पल थे कुछ सेकण्ड्स वाले
उसे मिनटों ,घंटो, महीनों में तब्दील करो ना
तुम तो चली गयी
अपना सामान बांध कर
फिर किसी ट्रैन में मुझसे मिलो ना
एक बार फिर मिलो ना
किसी गली के नुक्कड़ पे
चाय की स्टॉल पे
या किसी रिक्शे पे बैठी हुई
अपने लहराते पल्लू को समेटे दिख जाओ ना
एहसास तुम्हारे होने का
तुम्हारे जाने के बाद भी
मुझे ठहरा सा गया है
मुझे तुम्हारे लिए
तड़पा सा गया है
चल रही है साँसे जोर-जोर से
तुम सुन लो ना
फिर कहीं
मुझसे मिलो ना
आँखों से शुरु हुई थी जो
उसे आँखों पे ही खत्म करो ना
एक बार फिर दिखो ना–अभिषेक राजहंस

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