शहादत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

गद्दारों को फांसी दे दो, भीतर  घात  जो  करते हैं
अपने वतन के  खाते हैं , गले दुश्मन  के लगते हैं।
सबसे पहले घर को देखो, युद्ध फिर तुम कर लेना
छुपे कहाँ हैं ऐसे शातिर, उसका  पंख  कुतर  देना।

किस खेत की मूली है पाक , भीख से काम चलाता है
तंगहाल है जीवन  उसका , मांग – मांग  कर खाता है।
नंगा – भूखा बोलेगा क्या , छुप  कर वार कर जाता है
आतंकवाद पनाह  लेता हैं ,  एक – एक  मर  जाता है।

हर  बार  कष्ट  दिलाते  हो , हर  बार  तुझे  बचाते  हैं
अपना अंग समझ कर तुझको, अपना धर्म निभाते हैं।
बाज नहीं आदत से आते , अब तो कुछ  करना होगा
जितना तुम लगाओ ताकत, अब तुमको  मरना होगा।

चिंगारी बन गया शोला, जला  कर  भस्म कर डालेंगे
हर बार मुँह की खाया है, इस  बार  कसर  निकालेंगे।
आते नहीं  सामने क्यों तुम , लेकर  हिजड़ेे  फौज को
गीदड़ – चूहे से बत्तर हो, क्या नहीं जानते  नौज  को।

माथे की चमकती  बिंदिया, मांग सिंदूरी कहाँ गयी
आँसू संग बहते ये कज़रा, चूड़ा – कंगन कहाँ गयी।
है खामोश हिंद हमारा, रग – रग में गुस्सा छाया है
कुछ करने को सोच रहा, इस बार देख बौराया है।

बार – बार की गीदड़ भभकी, भारी पड़ने वाला है
दुनिया के अब मानचित्र से, पाक ये हटने वाला है।
शंखनाद बजनेे  वाला  है, नींद  तेरा  उड़  जायेगा
सुनो पाक के  मुल्लाओं , ईंट  से ईंट  बज जायेगा।

सेना  के  ये  वीर   सिपाही  , चून  – चून   कर   मारेंगे
दफ़न  नसीब  नहीं  होगा ,  अब  धरती  पर ही जारेंगे।
माँ  की  ममता  रोई  है , बहनों  से  भाई    बिछड़ा  है
पत्नी पागल बन गयी, बाप  का आशियाना  उजड़ा है।

2 Comments

  1. Sukhmangal Singh sukhmangal singh 23/02/2019
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 23/02/2019

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