उसूल – शिशिर मधुकर

सोचा किए जो वो ना हुआ कुछ तो बात है
दिन का समय भी आएगा गर आज रात है

आज वो ऊँचा भी है और डालियां हैं संग
पर जमीं पे एक दिन गिरता ये पात है

कोशिशें करता है जो वो जीत जाएगा
वक्त से हर शै को तो मिलती ही मात है

अब क्या करें शिकायतें उस इंसान से यहाँ
जिसके लहू में बह रहा बस एक घात है

ज़िन्दगी मधुकर चले बस निज उसूल से
देखो यहाँ कुछ भी नहीं होता बलात है

शिशिर मधुकर

Leave a Reply