उसके भी मरने पर

आख़िर वह मर गया।
अफसोस!

हमें उसके भी मरने पर

दु:ख हुआ।

इसलिए कि वह हमशक्ल था।

या

इस तसल्ली के लिए

कि अब और नहीं कर पाएगा वह शिकार हमारा।

कि अब न उसके नाखूनों पर ही और न मुँह में ही होगा

ख़ून हमारा।

कि अब और नहीं काट पाएगा वह हमें ख़ुद हमसे ही।

कि अब हँसना भी हमारा होगा और रोना भी।

और वह भी खुलकर।

 

शायद हम ऐसे ही हैं

और चाहते हैं बने रहना भी, ऐसे ही।

क्योंकि ऐसा ही

पाठ पढ़ाया था हमें

उस मरने वाले ने भी

जिसके मरने पर भी

अफसोस! हमें दु:ख हुआ।

 

इज़ाजत हो तो

देख लिया जाए

खरोंड उतार कर।

 

कहीं ऐसा तो नहीं

कि हम ख़ुद भी चाह रहे हों पकड़ना

वही राह उसकी

जिसके मरने पर

अफसोस! हमें दु:ख हुआ।

कि हम भी लगे हों चाहने

कि शेष को भी हो दु:ख

हमारे मरने पर

 

चाहे जैसा भी

हो जाने पर हमारे –

जैसे मरने पर उसके भी

दु:ख हुआ हमें

क्योंकि वह हमशक्ल था।

और यूँ सुधार रहे हों अपना परलोक!

 

कहीं ऐसा भी तो नहीं

कि हम शिकार हो रहे हों एक रिवाज की साजिश के –

कि हमें नहीं प्रकट करनी चाहिए

अपनी सहज ख़ुशी भी

किसी की मौत पर।

कि नहीं प्रकट करना चाहिए

अपना सहज संतोष भी।

 

कि हम नहीं चाहते दबाना गला

एक ज़हरीले सिलसिले का भी।

क्योंकि वह हमशक्ल है

क्योंकि उसमें भी प्राण हैं।

 

अफसोस!

हमें उसके भी मरने पर

दु:ख हुआ।

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