जाने कब क्या सही होगा

जाने कब क्या सही होगा
ये वक़्त और कितना इंतज़ार कराएगा
क्या कुछ मेरा भी होगा
या उम्मीदों की छत जमीन हो जाएगी
किस्तों में जी रहा हूं साँसे
क्या ये साँसे मुझे ज़िंदा रख पाएगी
क्या कुछ ऐसा होगा
जो मुझे मुझसे रूबरू करवाएगी
क्या कुछ होगा ऐसा
जिससे ज़िन्दगी बन जाएगी
हौंसलो की नींव खोखली होने लगी है
क्या कोई पत्थर
मेरे लिए मील का पत्थर बन पाएगा
या फिर ये ज़िन्दगी मुझे
बस उलझाती रह जाएगी–अभिषेक राजहंस

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