प्रेम मुजरिम :-विजय

जिंदगी की आग में
झुलसता रहा हूँ मैं
तेरी प्रेम की बारिश का
बहुत इंतजार किया हूँ मैं

डर है मुझको
तुझे खो न दूँ मैं
कारण इस डर के
खता कर गया हूं मैं

तेरे आँखों के मोती का
मुजरिम बन गया हूं मैं
सजा जो दे तू मुझको
उसका सज़दा करूँगा मैं

कायम रहे तेरे होठों की हँसी
यही दुआ करता हूँ मैं
रूठना ना फिर कभी तू
वर्ना जिंदगी से रूठ जाऊँगा मैं

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