व्यर्थ ना जाने देगे कुर्बानी-Bhawana kumari

आज कोई शब्द नहीं,कोई भाव नहीं,
ना चल रही क़लम मेरी आज,
नि:शब्द हो मेरी कलम आज,
बस इतना ही लिख रही हर बार लेखनी आज,
ना भूल पाऐगे वीरो की कुर्बानी ।

ऐ आतंकियों सोच ज़रा,
तुमने दोस्ती के बदले दुश्मनी किया,
प्यार के बदले नफ़रत दिया,
हर वक़्त पीठ पीछे ही वार किया ।

ना जाने इंसानियत तेरी कहाँ खो गई,
ज़मीर तुम्हरा कहाँ खो गया,
हो कश्मीर या पलवामा सब जगह,
तुमने धोखे से ही वार किया ।

कितनी पत्नी की मांगे उजड़ गयी,
बहन की राखी,माँ की गोद,
घर का दीपक,बच्चों का सहारा,
पिता की बुढ़ापे की लाठी,
सब कुछ तो तुमने छीन लिया ।

हमनें तो हाथ बढ़ाया था दोस्ती का,
तुमने गीदड़ की तरह वार किया
उजाड़ दिया वीरो का घर संसार तुमने,
रक्तरंजित पलवामा को कर दिया ।

रुला दिया तुमने मेरी भारत माता को,
व्यर्थ ना जाने देगे हम वीरो के वलिदानो को,
शत शत नमन उन वीर जवानों को
शत शत नमन उन वीर जवानों को ।
भावना कुमारी

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