चमन महके तो कैसे

चमन महके तो कैसे दोस्त कम मग़र दुश्मन ये बहुत हैं,
बस्तियां जलाने वालों के दिल और चेहरे काले बहुत हैं।

अनपढ़ रहना ही अच्छा है समझदार सी दुनिया में,
वगरना यहां किताब पढ़ कर लोग भटकते बहुत हैं।

जिनके आंचल से निकले थे बच्चे घाटी की तरफ,
आज उन माँ ओ की गोद में जिस्म के टुकड़े बहुत हैं।

ये पयाम भी संग लेता जा घर छोड़ के जाने वाले,
तेरी कसम तेरे पीछे तेरे चाहने वाले सिसकते बहुत हैं।

—भारत

Leave a Reply