अब कि होली पाक में-विक्रम जज्बाती

नरसिंघ का रुप धरो ,वार करो तुम छाती पर ,
गद्दरौ कि चीख गुंजा दो घाटी के हर कानो में ।

विनय कि वीणा बन्द करो, युध्द का शंखनाद कर ,
होली का ज़शन-ए-इंतेजाम मुकर्रर करो दो पाक में ।

शहीदों के क़तरे-क़तरे लहू का हिसाब कर,
जर्रा-जर्रा वसूल लो जज्बा-ए-इंतेकाम में ।

हिसाब कर ,हिसाब कर ,
दहश्तग़र्दो के सरों को धडो से आजाद कर

सज पड़ती है जन्नत माता तेरे लाल से
आज कर्ज बढ़ गया फ़िर से उनके इस बलिदान से ।

One Response

  1. Aniket Das 15/02/2019

Leave a Reply