चलो प्यार करें

तुमसे  चेहरे  का आईना लिये
उल्फत  अपनी  गुलजार  करें
इक  दूजे   से  खुल  जायें  तो
दिल  बातों  का   बाजार  करें
जो  दबी  हुई  दिल  के भीतर
होठों  से   अब   इजहार  करें
अब  तुम  शरमाना भी  छोड़ो
चलो प्यार करें चलो प्यार करें

कवि – मनुराज वार्ष्णेय

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