गणपति वंदना – डी के निवातिया

 

🙏गणपति वंदना🙏

उमासुत, गजानन, हे गणपति नाथ, अब तो आओ मेरे द्वार।
तुम ही मेरे जीवन रक्षक, एक तुम ही तो हो मेरे पालनहार ।।

तुम जो मेरे दर पे आओ
मोदक प्रिय अपने पाओ
पीतांबर से तुम्हे सजा दूँ
लड्डू तुमको भोग लगा दूँ
लाल रंग के पुष्प सजाकर
सिन्दूर चढ़ाकर करूँ श्रृंगार ।

उमासुत, गजानन, हे गणपति नाथ, अब तो आओ मेरे द्वार।
तुम ही मेरे जीवन रक्षक, एक तुम ही तो हो मेरे पालनहार ।।

एकदंत, विघ्न-नाश, विनायक
जल-तत्व के अधिपति नायक
दूब, दूध , चावल, तुम पर वारूँ
हल्दी चन्दन की आरती उतारूँ
तुम बिन मेरा घर आँगन सूना
लेकर आओ तुम अंकुश -पाश

उमासुत, गजानन, हे गणपति नाथ, अब तो आओ मेरे द्वार।
तुम ही मेरे जीवन रक्षक, एक तुम ही तो हो मेरे पालनहार ।।

रिद्धि सिद्धि के तुम हो दाता
लक्ष्मी विद्या धन तुम से आता
तुम हो मेरे जीवन खिवैया
भँवर में अटकी मेरी नैया
देवा आकर लगा दो पार
कृपा करो, बसा दो घर संसार

उमासुत, गजानन, हे गणपति नाथ, अब तो आओ मेरे द्वार।
तुम ही मेरे जीवन रक्षक, एक तुम ही तो हो मेरे पालनहार ।।

!

स्वरचित : डी के निवातिया

One Response

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/02/2019

Leave a Reply