रास्ते का मैं नहीं हूँ

मेरी धड़कनों में वो है कि जिसका मैं नहीं हूँ,
ओढ़ा हुआ हूँ जिसे उस पैरहन का मैं नहीं हूँ,

जब छोड़ा साहिलों को ये बात समझ आयी,
लहरों में मिल चुका हूँ साहिल का मैं नहीं हूँ,

आंधियों ने आकर नज़र को साफ कर दिया,
शाखों से गिर चुका हूँ किसी शज़र का मैं नहीं हूँ,

अब तक चला था ऐसे भटका नहीं कहीं भी,
इन नज़ारों में खो गया हूँ रास्ते का मैं नहीं हूँ,

बदलता है कैसे चेहरे बारिश का ये पानी,
मय में घुल चुका हूँ इन बादलों का मैं नहीं हूँ।

—भारत (ভারত জৈন)

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 07/02/2019
    • bharatjn75 07/02/2019

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