दोहावली – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

रखते सदैव साथ हैं , दिल अपने हनुमान ।
सीना चीर दिखा गये , राम नाम के शान।।

भालू – बंदर साथ थे , जामवंत के संग ।
राक्षस कितने मर गये, जीत गये प्रभु जंग।।

मामा मृग जी बन गये , रावण भगिना चोर ।
रास अपहरण आ गयी , सीता तब कमजोर।।

राम जी व्याकुल भुये, लक्ष्मण जी आधात ।
हताश रो – रो कर हुए, दोनों भये उदास।।

राक्षस कुल से तर गये, विभिषण परखे राम ।
भक्ति में रस बस गये , तभी बने सब काम।।

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  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 07/02/2019

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