दोहावली – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

सत्य शिवा सुंदर कहो, मन गहो महादेव।
चंदन- वंदन नित करो, तभी भजो गुरुदेव।।

भस्म रमाये फिर रहे , ऐसे भोले नाथ।
स्वामी हैं त्रिलोक के, सबके ऊपर हाथ।।

शीश चाँद है शोभता, बहती गंगा धार ।
हस्त त्रिशूल विशाल है,गले सर्प का हार।।

बांधा चौदह सूत्र में, डमरू का हर बोल।
वेद पुराणों में लिखा, अद्भुत यह अनमोल।।

जग का करते है भला, सब के पालनहार।
शरण आप जो जाइये , तो नैया हो पार।।

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  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/02/2019

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