क्या कहना – डी के निवातिया

क्या कहना

!

मेरे देश के चौकीदारों का, क्या कहना, भई क्या कहना।
एक से बढ़कर एक आया, कोई भाई बनकर, कोई बहना ।।

क्या कहना भई ,,,,,,,,,,,,,,,,,क्या कहना।
क्या कहना भई ,,,,,,,,,,,,,,,,,क्या कहना।

जिसके हिस्से जितनी आई,
जी भरकर है, लूट मचाई,
अमृत के तुम हकदार बनें,
जनता को जहर पड़े पीना ,,,,,,,,!

क्या कहना भई ,,,,,,,,,,,,,,,,,क्या कहना।
क्या कहना भई ,,,,,,,,,,,,,,,,,क्या कहना।

माल लुटाकर जनता का,
सुख पाया सम्पन्नता का,
तुम्हारी हरकतों का दण्ड,
हम सबको पड़ता है सहना,,,,,,,,,!

क्या कहना भई ,,,,,,,,,,,,,,,,,क्या कहना।
क्या कहना भई ,,,,,,,,,,,,,,,,,क्या कहना।

जात – धर्म का खेल निराला,
हर कोई बनता दास तुम्हारा,
मंदिर-मस्जिद बनें अखाड़े,
मदिरालयों में छलके पैमाना ,,,,,,!

क्या कहना भई ,,,,,,,,,,,,,,,,,क्या कहना।
क्या कहना भई ,,,,,,,,,,,,,,,,,क्या कहना।

खादी भूल गए, रेशम पहनते,
कुत्ते तुम्हारे यानों में टहलते,
पढ़ी-लिखी फिरे जनता भारी,
बेकारी की अग्न में पड़े दहना,,,,,,,,!

क्या कहना भई ,,,,,,,,,,,,,,,,,क्या कहना।
क्या कहना भई ,,,,,,,,,,,,,,,,,क्या कहना।

मुफ्त ख़िलानें का सपना पाला,
कितना करते हो गड़बड़ झाला,
बिन मेहनत की सबको चाहिए
कैसे चमकेंगे वतन के नैना ,,,,,,,,,,,!

क्या कहना भई ,,,,,,,,,,,,,,,,,क्या कहना।
क्या कहना भई ,,,,,,,,,,,,,,,,,क्या कहना।

सत्तर बीत गए आज़ादी को,
तरस रहे अबतक रोटी-पानी को,
न जाने तुम कैसे समझोगें,
कब मिलेगा खुशहाली का गहना,,,,,,,,!

क्या कहना भई ,,,,,,,,,,,,,,,,,क्या कहना।
क्या कहना भई ,,,,,,,,,,,,,,,,,क्या कहना।



स्वरचित: डी के निवातिया

8 Comments

  1. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 02/02/2019
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 11/03/2019
  2. mukta Mukta Sharma 02/02/2019
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 11/03/2019
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 05/02/2019
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 11/03/2019
  4. deveshdixit Devesh Dixit 07/02/2019
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 11/03/2019

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