दिल तुम धड़कते क्यों नहीं

दिल तुम धड़कते क्यों नहीं
इतना हसीन मौसम है तुम बहकते क्यों नहीं
जो फूल मुरझा कर झुक गए हैं नीचे की तरफ ये महकते क्यों नही
बड़े उतरे उतरे से लगते हो तुम क्या मालूम चहकते क्यों नहीं

वो आती है फ़िर चली जाती है
तुम बच्चे की तरह बिलखते क्यों नहीं
बड़ी आसानी से देखते रहते हो जाते हुए उसको
कभी हक से हाथ उसका पकड़ते का नहीं

सिर्फ भंवरा ही तो मर गया है उन फूलों का
कोई पूछो उनसे वो खिलते क्यों नहीं

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