हद होती है

हद होती है…
यू लड़ने की
हर बात पर बिगड़ने की

छोटी-छोटी बातों पर नाराज होकर
फिर मुझ पर ही अकड़ने की

बड़ी बखूबी से तुम ज़ज्बात अपने छुपा लेते हो
दर्द दिल में समा कर भी चेहरे से मुस्कुरा लेते हो

हद होती है….
इस कदर गुमनाम रहने की भी
हमसे नाराज रहने की भी

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  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 02/02/2019

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