श्रृंगार – छंद – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

श्रृंगार छंद

राम को जानो भज लो सभी
बोल कर सीता हनुमत अभी ।
भाग मत अब शरणा गत रहो
पार भव सागर से हो अभी ।।

झूठ की वाणी अब मत कहो
साथ में रहकर भी सच रहो ।
हो रहा देख अन्याय कहीं
तो विकार आप ये मत सहो।।

कोन करता अपनो का भला
जान मारता दबाकर गला।
ताक रहे उस पर नज़र रखो
देख अब धूम रहा मन चला।।

और अब तेरा क्या हाल है
साथ हम रहें ये ख्याल है।
दूर हम थे तो ये भूल थी
बात उनकी , मेरी चाल है।।

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