दोहे – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

सूरदास ने रच दिया , अनुपम यह इतिहास ।
रूप सलोना लिख गये, जैसे प्रभु हों पास।।

जड़ चेतन चैतन्य से, परख लिये अनुराग।
ऐसा वर्णन कर गये, दिये वो ज्ञान पराग।।

भक्ति रस में डूब गये, और किये श्रृंगार ।
कंठ स्वर संगीत से, जीवन लिये निखार।।

शब्द- शब्द अनमोल है, उनका अर्थ विशाल
समझ – समझ का फेर है, जो समझा नेहाल।

रूप रंग श्रृंगार का, अद्भुत है संयोग।
गहराई को देख के, डूब रहे सब लोग।।

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  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 02/02/2019

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