गणतंत्र – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

हम नहीं अब चुप रहने वाले
चाहे जितना भी आप कर लो ।
गणतंत्र सिखाता है सभी को
मन ऐसे दिल प्रेम रस भर लो।।

शत-शत नमन है वीर सपूतों
जग में हो तेरी जय- जयकार ।
अमर शहीद की शान निराली
धरा करती तुमको सत्यकार।।

बहुत खून थे बहे माटी पर
फांसी पर कितने थे लटके।
सेवक थे वो देश के अपने
भागे तब थे फिरंगी चटके।

आजाद यह वतन हमारा है
जय हिंद हमारा ही नारा है।
हम बचाये अपने थाती को
याद रखें अपने ख्याती को।।

धर्मनिरपेक्ष लोक तंत्र है
मानव जीवन का ये मंत्र है।
जाती धर्म मजहब है साथ
ऐसी कुंजी हम सबके हाथ।।

सीमा पर के शेर सिपाही
हैं देखो कितने उत्साही।
दुश्मन को मार गिराते हैं
सीने पर गोली खाते हैं।।

2 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 30/01/2019

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